शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

Kuch purani yaade

वो लड़कीया भी किसी आतंकवादी से कम नही हुआ करती थी...
जो टिचर के क्लास मे आते ही याद
दिला देती है ..

सर आपने टेस्ट का बोला था...
😂
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😡
😡
😡

आजकल के बच्चे क्या समझेंगे
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हमने किन मुश्किल परिस्थितियों में पढ़ाई की है,

कभी कभी तो मास्टर जी हमें
मूड फ्रेश करने के लिये ही कूट दिया करते थे
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मन की बात...

आज कल के बच्चे रिफ्रेश होने के लिए जहाँ वाटर पार्क, गेम सेंटर जाने की जिद करते हैं ...

वहीं हम ऐसे बच्चे थे जो मम्मी-पापा के एक झापङ से ही फ्रेश हो जाते थे.!
😂
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वो भी क्या दिन थे....????
जब बच्चपन में कोई रिश्तेदार जाते समय 10 ₹ दे जाता था..

और माँ 8₹ टीडीएस काटकर 2₹ थमा देती थी....!!!
😁
😁
😁
😁
😁
😁
😁
😁

घर का T.V बिगड़ जाए
तो माता-पिता कहते हैं..
बच्चों ने बिगाड़ा है;

और अगर बच्चे बिगड़ जाएं तो
कहते है..
T.V. ने बिगाड़ा है !!!
😛😛😛😛😛😛😛😛

आज कल के माँ बाप सुबह स्कूल बस में बच्चे को बिठा के ऐसे बाय बाय करते हैं जैसे पढ़ने नहीं विदेश यात्रा भेज रहें हो....

और
एक हम थे जो रोज़ लात खा के स्कूल जाते थे...
😤😤😤😤😤😤😤😤

4-4साल के बच्चे गाते फिर रहे हैं
"छोटी ड्रेस में बॉम्ब लगदी मैनु"

साला जब हम चार साल के थे तो 1 ही वर्ड याद था..
वही गाते फिरते थे...
"शक्ति शक्ति शक्तिमान-शक्तिमान"
😇😇😇😇😇😇😇😇

भला हो हनी सिंह और जॉन सीना का..
जिसने आज के बच्चो को फैशन के नाम पे बाल बारीक़ छोटे रखना सीखा दिया..

हमारी तो सबसे ज्यादा कुटाई ही बालो को लेके हुई थी।।
हम दिलजले के अजय देवगन बनके घूमते थे,
और जिस दिन पापा के हाथ लग जाते उस दिन नाईं की दुकान से क्रन्तिविर के नाना पाटेकर  बनाके ही घर लाते थे।।।
😂😂

मैसेज अच्छा है पड़ना जरूर

मैसेज अच्छा है पड़ना जरूर




छोटा सा जीवन है, लगभग 80 वर्ष।
उसमें से आधा =40 वर्ष तो रात को
बीत जाता है। उसका आधा=20 वर्ष
बचपन और बुढ़ापे मे बीत जाता है।
बचा 20 वर्ष। उसमें भी कभी योग,
कभी वियोग, कभी पढ़ाई,कभी परीक्षा,
नौकरी, व्यापार और अनेक चिन्ताएँ
व्यक्ति को घेरे रखती हैँ।अब बचा ही
कितना ? 8/10 वर्ष। उसमें भी हम
शान्ति से नहीं जी सकते ? यदि हम
थोड़ी सी सम्पत्ति के लिए झगड़ा करें,
और फिर भी सारी सम्पत्ति यहीं छोड़
जाएँ, तो इतना मूल्यवान मनुष्य जीवन
प्राप्त करने का क्या लाभ हुआ?
स्वयं विचार कीजिये :- इतना कुछ होते हुए भी,
1- शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
👍मौन होना सब से बेहतर है।

2- दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
👍सफेद रंग सब से बेहतर है।

3- खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
👍उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है।

4-पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
👍पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है।

5- देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
👍बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है।

6- सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
👍अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है।

7- जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
👍सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतर है।

इंसान के अंदर जो समा जायें वो
             " स्वाभिमान "
                    और
जो इंसान के बाहर छलक जायें वो
             " अभिमान "

✔जब भी बड़ो के साथ बैठो तो  
      परमात्मा का धन्यवाद ,
     क्योंकि कुछ लोग
      इन लम्हों को तरसते हैं ।

✔जब भी अपने काम पर जाओ
      तो परमात्मा का धन्यवाद करो
     क्योंकि
     बहुत से लोग बेरोजगार हैं ।

✔परमात्मा का धन्यवाद कहो
     जब तुम तन्दुरुस्त हो ,
     क्योंकि बीमार किसी भी कीमत
     पर सेहत खरीदने की ख्वाहिश
      रखते हैं ।

✔ परमात्मा का धन्यवाद कहो
      की तुम जिन्दा हो ,
      क्योंकि मरते हुए लोगों से पूछो
      जिंदगी कीमत

शनिवार, 6 अगस्त 2016

कहाँ गयी तीसरी बकरी

*कहाँ गयी तीसरी बकरी?*

रोहित और मोहित बड़े शरारती बच्चे थे, दोनों 5th स्टैण्डर्ड के स्टूडेंट थे और एक साथ ही स्कूल आया-जाया करते थे।

एक दिन जब स्कूल की छुट्टी हो गयी तब मोहित ने रोहित से कहा, “ दोस्त, मेरे दिमाग में एक आईडिया है?”

“बताओ-बताओ…क्या आईडिया है?”, रोहित ने एक्साईटेड होते हुए पूछा।

मोहित- “वो देखो, सामने तीन बकरियां चर रही हैं।”

रोहित- “ तो! इनसे हमे क्या लेना-देना है?”

मोहित-” हम आज सबसे अंत में स्कूल से निकलेंगे और जाने से पहले इन बकरियों को पकड़ कर स्कूल में छोड़ देंगे, कल जब स्कूल खुलेगा तब सभी इन्हें खोजने में अपना समय बर्वाद करेगे और हमें पढाई नहीं करनी पड़ेगी…”

रोहित- “पर इतनी बड़ी बकरियां खोजना कोई कठिन काम थोड़े ही है, कुछ ही समय में ये मिल जायेंगी और फिर सबकुछ नार्मल हो जाएगा….”

मोहित- “हाहाहा…यही तो बात है, वे बकरियां आसानी से नहीं ढूंढ पायेंगे, बस तुम देखते जाओ मैं क्या करता हूँ!”

इसके बाद दोनों दोस्त छुट्टी के बाद भी पढ़ायी के बहाने अपने क्लास में बैठे रहे और जब सभी लोग चले गए तो ये तीनो बकरियों को पकड़ कर क्लास के अन्दर ले आये।

अन्दर लाकर दोनों दोस्तों ने बकरियों की पीठ पर काले रंग का गोला बना दिया। इसके बाद मोहित बोला, “अब मैं इन बकरियों पे नंबर डाल देता हूँ।, और उसने सफेद रंग से नंबर लिखने शुरू किये-

पहली बकरी पे नंबर 1
दूसरी पे नंबर 2
और तीसरी पे नंबर 4

“ये क्या? तुमने तीसरी बकरी पे नंबर 4 क्यों डाल दिया?”, रोहित ने आश्चर्य से पूछा।

मोहित हंसते हुए बोला, “ दोस्त यही तो मेरा आईडिया है, अब कल देखना सभी तीसरी नंबर की बकरी ढूँढने में पूरा दिन निकाल देंगे…और वो कभी मिलेगी ही नहीं…”

अगले दिन दोनों दोस्त समय से कुछ पहले ही स्कूल पहुँच गए।

थोड़ी ही देर में स्कूल के अन्दर बकरियों के होने का शोर मच गया।

कोई चिल्ला रहा था, “ चार बकरियां हैं, पहले, दुसरे और चौथे नंबर की बकरियां तो आसानी से मिल गयीं…बस तीसरे नंबर वाली को ढूँढना बाकी है।”

स्कूल का सारा स्टाफ तीसरे नंबर की बकरी ढूढने में लगा गया…एक-एक क्लास में टीचर गए अच्छे से तालाशी ली। कुछ खोजू वीर स्कूल की

छतों पर भी बकरी ढूंढते देखे गए… कई सीनियर बच्चों को भी इस काम में लगा दिया गया।

तीसरी बकरी ढूँढने का बहुत प्रयास किया गया….पर बकरी तब तो मिलती जब वो होती…बकरी तो थी ही नहीं!

आज सभी परेशान थे पर रोहित और मोहित इतने खुश पहले कभी नहीं हुए थे। आज उन्होंने अपनी चालाकी से एक बकरी अदृश्य कर दी थी।

दोस्तों, इस कहानी को पढ़कर चेहरे पे हलकी सी मुस्कान आना स्वाभाविक है। पर इस मुस्कान के साथ-साथ हमें इसमें छिपे सन्देश को भी ज़रूर समझना चाहिए। तीसरी बकरी, दरअसल वो चीजें हैं जिन्हें खोजने के लिए हम बेचैन हैं पर वो हमें कभी मिलती ही नहीं….क्योंकि वे reality में होती ही नहीं!

हम ऐसी लाइफ चाहते हैं जो perfect हो, जिसमे कोई problem ही ना हो…. it does not exist!
हम ऐसा life-partner चाहते हैं जो हमें पूरी तरह समझे जिसके साथ कभी हमारी अनबन ना हो…..it does not exist!
हम ऐसी job या बिजनेस चाहते हैं, जिसमे हमेशा सबकुछ एकदम smoothly चलता रहे…it does not exist!

क्या ज़रूरी है कि हर वक़्त किसी चीज के लिए परेशान रहा जाए? ये भी तो हो सकता है कि हमारी लाइफ में जो कुछ भी है वही हमारे life puzzle को solve करने के लिए पर्याप्त हो….ये भी तो हो सकता है कि जिस तीसरी चीज की हम तलाश कर रहे हैं वो हकीकत में हो ही ना….और हम पहले से ही complete हों!

So, let us stop being insane and start realizing the happiness we are already blessed with!

गहरी बात

                              *_गहरी बात _*
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*बेजुबान पत्थर पे लदे है करोंडो के गहने मंदिरो में ।*
*उसी देहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हें हाथों को देखा है।*
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*_सजे थे छप्पन भोग और मेवे मूर्ती के आगे ।_*
*_बाहर एक फ़कीर को भूख से तड़प के मरते देखा है ll_*
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*लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार,*
*पर बाहर एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है।*
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*_वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हॉल के लिए,_*
*_घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई बदलते देखा है।_*
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*सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को,*
*आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है।*
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*_जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन,_*
*_आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है ।_*
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*जिसने नहीं दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी ,*
*आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा ll*
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*_दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस बेटी को जबरन बाप ने,_*
*_आज पीटते उसी शौहर के हाथों सरे बाजार देखा है ।_*
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*मारा गया वो पंडित बेमौत सड़क दुर्घटना में यारों ,*
*जिसे खुद को काल सर्प,तारे और हाथ की लकीरों का माहिर लिखते देखा है*
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*_जिस घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों_*
*_आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।_*
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*बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,*
*अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।*
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*_आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर,_*
*_अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।_*
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*गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है*
*उन्होंने देख लिया कि,इंसान हमसे अच्छा नोंचता है।*
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*_कुत्ते कोमा में चले गए,ये देखकर कि_*
*_क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान को देखा है ।_*
*इस कविता को मैंने आप तक पहुंचाने में सिर्फ उंगली का उपयोग किया है और लिखने वाले को सादर नमन किया है��*

Jocks

😄😄😂😂😁😁😁😁
लड़की ने नमाज पढी•••और शादी के लिए दुआ मागने लगी!
तो शर्म आ गई ••

कहने लगी या अल्लाह मैं अपने लिए नहीं मांगती ••••••बस मेरी अम्मी को एक खूबसूरत दामाद दे दे!!!

दुआ क़ुबूल हुई और उसके छोटी बहन की शादी हो गई •••

सीख•••••{ दुआ में overacting से परहेज करें }

😜
आज का ज्ञान-

जिंदगी बस 2 दिन की है…

एक तो शनिवार और एक रविवार

बाकी दिन तो ऐसा लगता है कि जलील होने के लिए पैदा हुए हैं।
                  -एक कर्मचारी
😂

एक नेपाली के मोबाइल पर रात के 2 बजे काल आया,
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आप सो तो नही रहे है
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नेपाली गुस्से से : “….कमीनो यह तो जरूरी नही की हर नेपाली चौकीदार ही हो।

😜
टीचर: पप्पू, मैंने तुम्हें थप्पड मारा, इसका भविष्य काल बताओ।

पप्पू: छुट्टी के बाद आपकी मोटर-साईकल पंचर मिलेगी।
😈



सब्जीवाला- साहब सब्जी लेनी हे या नहीं ?
खाली छांट रहे हो
ग्राहक – भाई पहले छांट क़र फ़ोटो खींच क़र बीवी को whats app करूँगा…..
वो salect करेगी वो ही लूँगा….

सब्जीवाला अभी तक होश में नहीं आया😜😜😜😜😜
😀😀😀😀😀😀😂😂



जब हम किसी शादी समारोह मे जाते है और दूल्हे की माँ कहती है..
बेटा, खाना खाए बिना मत जाना.
अब उनको कौन समझाए हम तो आये ही खाना खाने थे...
 😜😜😜😜


दो आदमी शराब के नशे में धुत्त होकर रेल की पटरियों के बीचों-बीच जा रहे थे....

पहला : हे भगवान, मैंने इतनी सीढ़ियां पहले कभी नहीं चढ़ीं

दूसरा: अरे सीढ़ियाँ तो ठीक हैं, मैं तो इस बात को लेकर हैरान हूं कि
हाथ से पकड़ने के लिए रेलिंग कितने नीचे लगी हुई हैं .....
😄😄😄😀😀😀😀

गुरुवार, 4 अगस्त 2016

Msg

🌸🔆🌸🔆🌸🔆🌸🔆🌸🔆

          "कर्म" एक ऐसा रेस्टोरेंट है ,
               जहाँ ऑर्डर देने की
                  जरुरत नहीं है
             हमें वही मिलता है जो
                 हमने पकाया है।
         
            जिंदगी की बैंक में जब
             " प्यार " का " बैलेंस "
                 कम हो जाता है
             तब " हंसी-खुशी " के
           चेक बाउंस होने लगते हैं।

                 इसलिए हमेशा
                 अपनों के साथ
           नज़दीकियां बनाए रखिए ।
🌸🔆🌸 सुप्रभातम🌸🔆🌸

दिल को छूने वाली लाईन

बहुत सुंदर
     दिल को छूने वाली लाईन


सपने मे अपनी मौत को करीब से देखा....😓

कफ़न में लिपटे तन जलते अपने शरीर को देखा.....😭

खड़े थे लोग हाथ बांधे एक कतार में...

कुछ थे परेशान कुछ उदास थे .....

पर कुछ छुपा रहे अपनी मुस्कान थे..

दूर खड़ा देख रहा था मैं ये सारा मंजर.....

.....तभी किसी ने हाथ बढा कर मेरा हाथ थाम लिया ....

और जब देखा चेहरा उसका तो मैं बड़ा हैरान था.....

हाथ थामने वाला कोई और नही...मेरा भगवान था...

चेहरे पर मुस्कान और नंगे पाँव था....

जब देखा मैंने उस की तरफ जिज्ञासा भरी नज़रों से.....

तो हँस कर बोला....
"तूने हर दिन दो घडी जपा मेरा नाम था.....
आज प्यारे उसका क़र्ज़ चुकाने आया हूँ...।"

रो दिया मै.... अपनी बेवक़ूफ़ियो पर तब ये सोच कर .....

जिसको दो घडी जपा
वो बचाने आये है...
और जिन मे हर घडी रमा रहा
वो शमशान पहुचाने आये है....


तभी खुली आँख मेरी बिस्तर पर विराजमान था.....
कितना था नादान मैं हकीकत से अनजान था....